सांझ डायरी 📝


राजपथ के किनारे पर बैठी लड़की कि नज़र
अस्ताचल (डूबते )सूर्य कि लालिमा पर पड़ी और उसकी आँखे चमक उठी उसने तुरंत उस बेहद दिलकश नज़ारे को साझा करने के लिए बगल ही में बैठे प्रेमी से कहा
देखो मुझे उसमे तुम ही परिकल्पित हो रहे हो.....
तुम्हारा नाम क्षितिज कि लाल बिंदी बन गया है......
प्रेमी ने उसकी उत्सुक आँखों में डूबते हुए हिंदी फिल्म के गाने कि एक की रचना दोहराई 
''तेरे चेहरे से नज़र नहीं--
हटती नज़ारे हम क्या देखें'....
लड़की समझी सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड इसी एक पंक्ति में सिमट आई है ......
समय के घूमते परीधि पर एक शाम ऐसी भी आई
जब उसी लड़की ने अस्ताचल सूर्य को देख प्रेमी को देखा
और उसने कहा......
क्या ?
कुछ कहना चाहती हो ? 
फिर कुछ समय बाद अनन्त निस्तब्धता फैल जाता है।
जीवन भी तो ऐसा ही होता है, अस्ताचल के शिखर पर पहुंचकर एकाएक दृष्टीगोचर हो जाता है। 👀👀

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